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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने के फैसले का स्वागत, लेकिन भारत रत्न की मांग बरकरार- जेएमएम 

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रांची
झारखंड आंदोलन के प्रणेता, अलग झारखंड राज्य के निर्माता, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता जननायक समाज सुधारक स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की सूची जारी करते हुए लोक कल्याण और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में गुरुजी के नाम की घोषणा की। इस निर्णय का झारखंड सहित देशभर में स्वागत किया जा रहा है।


दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उनके जीवन ने संघर्ष का रास्ता चुना। महाजनी शोषण, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के खिलाफ उन्होंने संगठित आंदोलन खड़ा किया और आदिवासी-मूलवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक किया। जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके पूरे राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का केंद्रीय आधार रहा। नशा मुक्ति, शिक्षा और सामाजिक चेतना के लिए उनके प्रयासों ने आदिवासी समाज को नई दिशा दी।


चार दशकों से अधिक समय तक दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन का चेहरा बने रहे। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और दुमका लोकसभा क्षेत्र से आठ बार सांसद चुने गए। इसके अलावा वे राज्यसभा सदस्य और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका विचार, संघर्ष और विरासत आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई को प्रेरणा दे रही है।


इस बीच, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय ने पद्म भूषण सम्मान दिए जाने के लिए भारत सरकार के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने जंगल, पहाड़ और गांव में रहने वाले आदिवासी समाज की आवाज़ को देश के सर्वोच्च सदनों तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी के योगदान को देखते हुए भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी।


विनोद पांडेय ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने भारत के जंगलों की आवाज़ को संसद तक पहुंचाया और हाशिये पर खड़े आदिवासी-मूलवासी समाज को सम्मान के साथ जीने की चेतना दी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अब तक किसी आदिवासी नेता को भारत रत्न नहीं मिला है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि आदिवासी समाज में नायक नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि आदिवासी समाज को लंबे समय तक मुख्यधारा से बाहर रखा गया।


उल्लेखनीय है कि इससे पहले झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। पद्म भूषण सम्मान को उनके संघर्ष की राष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन साथ ही उनके समर्थक और आदिवासी समाज यह मानता है कि गुरुजी भारत रत्न के सच्चे अर्थों में हकदार हैं। उनकी विरासत झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संघर्षों का एक अमिट अध्याय बनी रहेगी।


 

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